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mahabharat 6.121.36: मैंने, विदुर, द्रोणाचार्य, परशुराम, भगवान श्रीकृष्ण और संजय ने बार-बार युद्ध न करने की सलाह दी; परन्तु दुर्योधन ने हमारी बात नहीं मानी।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.121.36 
न वै श्रुतं धार्तराष्ट्रेण वाक्यं
मयोच्यमानं विदुरेण चैव।
द्रोणेन रामेण जनार्दनेन
मुहुर्मुहु: संजयेनापि चोक्तम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैंने, विदुर, द्रोणाचार्य, परशुराम, भगवान श्रीकृष्ण और संजय ने बार-बार युद्ध न करने की सलाह दी; परन्तु दुर्योधन ने हमारी बात नहीं मानी।
 
I, Vidura, Dronacharya, Parashurama, Lord Krishna and Sanjaya have repeatedly advised not to fight; But Duryodhana did not listen to us.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)