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mahabharat 6.121.34: ‘चलनेवाले प्राणियों में मनुष्य श्रेष्ठ माना गया है, पक्षियों में पक्षीराज गरुड़ श्रेष्ठ माना गया है, नदियों में समुद्र श्रेष्ठ है और चौपायों में गौ श्रेष्ठ मानी गई है॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.121.34 
मनुष्या जगति श्रेष्ठा: पक्षिणां पतगेश्वर:।
सरितां सागर: श्रेष्ठो गौर्वरिष्ठा चतुष्पदाम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘चलनेवाले प्राणियों में मनुष्य श्रेष्ठ माना गया है, पक्षियों में पक्षीराज गरुड़ श्रेष्ठ माना गया है, नदियों में समुद्र श्रेष्ठ है और चौपायों में गौ श्रेष्ठ मानी गई है॥ 34॥
 
‘Among the moving creatures, human beings are considered superior, among the birds, the king of birds Garuda is considered superior, among the rivers, the ocean is superior and among the four-legged animals, the cow is considered superior.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)