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mahabharat 6.121.32-33: पार्थ! ज्ञानी लोग तुम्हें समस्त क्षत्रियों का मृत्युरूप जानते हैं। तुम पृथ्वी के पुरुषों में श्रेष्ठ और धनुर्धरों में प्रधान हो।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 32-33
 
 
श्लोक  6.121.32-33 
विदुस्त्वां निधनं पार्थ सर्वक्षत्रस्य तद्विद:॥ ३२॥
धनुर्धराणामेकस्त्वं पृथिव्यां प्रवरो नृषु॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! ज्ञानी लोग तुम्हें समस्त क्षत्रियों का मृत्युरूप जानते हैं। तुम पृथ्वी के पुरुषों में श्रेष्ठ और धनुर्धरों में प्रधान हो।
 
‘Partha! Knowledgeable people know you to be the death of all Kshatriyas. You are the best among men on earth and the chief among archers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)