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mahabharat 6.121.30-32h: महाबाहु कौरवनंदन! आपमें ऐसा पराक्रम होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। आप महापराक्रमी योद्धा हैं। नारदजी ने मुझे पहले ही बता दिया था कि आप प्राचीन महर्षि हैं और नारायणस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की सहायता से इस पृथ्वी पर ऐसे महान कार्य करेंगे, जिन्हें अन्य समस्त देवताओं सहित देवराज इन्द्र भी नहीं कर सकते।।30-31 1/2।।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 30-32h
 
 
श्लोक  6.121.30-32h 
नैतच्चित्रं महाबाहो त्वयि कौरवनन्दन॥ ३०॥
कथितो नारदेनासि पूर्वर्षिरमितद्युते।
वासुदेवसहायस्त्वं महत् कर्म करिष्यसि॥ ३१॥
यन्नोत्सहति देवेन्द्र: सह देवैरपि ध्रुवम्।
 
 
अनुवाद
महाबाहु कौरवनंदन! आपमें ऐसा पराक्रम होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। आप महापराक्रमी योद्धा हैं। नारदजी ने मुझे पहले ही बता दिया था कि आप प्राचीन महर्षि हैं और नारायणस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण की सहायता से इस पृथ्वी पर ऐसे महान कार्य करेंगे, जिन्हें अन्य समस्त देवताओं सहित देवराज इन्द्र भी नहीं कर सकते।।30-31 1/2।।
 
‘Mahabahu Kauravanandan! It is not surprising that you have such valour. You are a mighty warrior! Naradji had already told me that you are an ancient Maharshi and with the help of Lord Krishna in the form of Narayana, you will perform such great deeds on this earth that even Devraj Indra along with all the other gods cannot perform. 30-31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)