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mahabharat 6.121.29-30h: राजन! उस जल से तृप्त होकर शान्तनुनन्दन भीष्म ने समस्त वीर राजाओं के सामने अर्जुन की स्तुति करते हुए उससे इस प्रकार कहा - 29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  6.121.29-30h 
तृप्त: शान्तनवश्चापि राजन् बीभत्सुमब्रवीत्॥ २९॥
सर्वपार्थिववीराणां संनिधौ पूजयन्निव।
 
 
अनुवाद
राजन! उस जल से तृप्त होकर शान्तनुनन्दन भीष्म ने समस्त वीर राजाओं के सामने अर्जुन की स्तुति करते हुए उससे इस प्रकार कहा - 29 1/2॥
 
Rajan! Satisfied with that water, Shantanunandan Bhishma said to Arjuna in front of all the brave kings praising him thus - 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)