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mahabharat 6.121.28-29h: वहाँ बैठे राजा आश्चर्यचकित हो गए और अपने दुपट्टे इधर-उधर लहराने लगे। शंख और नगाड़ों की गूँज हर जगह गूँज उठी।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  6.121.28-29h 
विस्मयाच्चोत्तरीयाणि व्याविध्यन् सर्वतो नृपा:॥ २८॥
शङ्खदुन्दुभिनिर्घोषस्तुमुल: सर्वतोऽभवत्।
 
 
अनुवाद
वहाँ बैठे राजा आश्चर्यचकित हो गए और अपने दुपट्टे इधर-उधर लहराने लगे। शंख और नगाड़ों की गूँज हर जगह गूँज उठी।
 
The kings sitting there were astonished and started waving their dupattas everywhere. The deep sound of conches and drums echoed everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)