vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 6: भीष्म पर्व
»
अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना
»
श्लोक 27-28h
श्लोक
6.121.27-28h
तत् कर्म प्रेक्ष्य बीभत्सोरतिमानुषविक्रमम्॥ २७॥
सम्प्रावेपन्त कुरवो गाव: शीतार्दिता इव।
अनुवाद
अर्जुन का यह अद्भुत कार्य देखकर समस्त कौरव शीत से पीड़ित गायों के समान काँपने लगे।
Seeing Arjun's extraordinary deed, all the Kauravas began to tremble like cows tormented by cold. 27 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×