श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  6.121.26-27h 
कर्मणा तेन पार्थस्य शक्रस्येव विकुर्वत:॥ २६॥
विस्मयं परमं जग्मुस्ततस्ते वसुधाधिपा:।
 
 
अनुवाद
इन्द्र के समान पराक्रमी अर्जुन के उस अद्भुत कार्य से वहाँ बैठे हुए समस्त भूपाल महान् विस्मित हो गए ॥26 1/2॥
 
Due to that wonderful act of Arjuna, who was as mighty as Indra, all the Bhupalas sitting there were greatly astonished. 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)