Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 6.121.24-26h: फिर एक सुन्दर, निर्मल, अमृत के समान शीतल, मधुर, दिव्य सुगन्ध और दिव्य रस से युक्त जल की धारा ऊपर की ओर उठने लगी (और भीष्म के मुख में गिर पड़ी)। उस शीतल जलधारा से अर्जुन ने कौरवों में श्रेष्ठ, दिव्य कर्म और पराक्रम से युक्त भीष्म को तृप्त किया। 24-25 1/2 | mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना । mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
फिर एक सुन्दर, निर्मल, अमृत के समान शीतल, मधुर, दिव्य सुगन्ध और दिव्य रस से युक्त जल की धारा ऊपर की ओर उठने लगी (और भीष्म के मुख में गिर पड़ी)। उस शीतल जलधारा से अर्जुन ने कौरवों में श्रेष्ठ, दिव्य कर्म और पराक्रम से युक्त भीष्म को तृप्त किया। 24-25 1/2
Then a beautiful, clear stream of water, cool and sweet like nectar and combined with divine fragrance and divine juice, started rising upwards (and fell into Bhishma's mouth). With that cool stream of water, Arjuna satisfied Bhishma, the best of the Kurus, who had divine deeds and bravery. 24-25 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥