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श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.121.21 
तस्य ज्यातलनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशने:।
वित्रेसु: सर्वभूतानि सर्वे श्रुत्वा च पार्थिवा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उसके धनुष की टंकार वज्र की गड़गड़ाहट के समान थी, जिसे सुनकर समस्त प्राणी और देश के सभी राजा भयभीत हो गए।
 
The twang of his bow sounded like the rumbling of thunderbolts. Hearing it, all the creatures and all the kings of the land got frightened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)