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mahabharat 6.121.20: तब 'बहुत अच्छा' कहकर वीर अर्जुन रथ पर सवार हुए और गाण्डीव धनुष पर बलपूर्वक प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे खींचने लगे।   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.121.20 
अर्जुनस्तु तथेत्युक्त्वा रथमारुह्य वीर्यवान्।
अधिज्यं बलवत् कृत्वा गाण्डीवं व्याक्षिपद् धनु:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
तब 'बहुत अच्छा' कहकर वीर अर्जुन रथ पर सवार हुए और गाण्डीव धनुष पर बलपूर्वक प्रत्यंचा चढ़ाकर उसे खींचने लगे।
 
Then saying 'very good' the valiant Arjun mounted the chariot and forcefully strung the Gandiva bow and began pulling it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)