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mahabharat 6.121.18: हे अर्जुन! तुम्हारे बाणों ने मेरे शरीर के सभी अंगों को छेद दिया है; इसलिए मेरा शरीर जल रहा है। मेरे सभी अंगों में अत्यंत पीड़ा हो रही है। मेरा मुख सूख रहा है॥18॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.121.18 
दह्यतीव शरीरं मे संवृतस्य तवेषुभि:।
मर्माणि परिदूयन्ते मुखं च परिशुष्यति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! तुम्हारे बाणों ने मेरे शरीर के सभी अंगों को छेद दिया है; इसलिए मेरा शरीर जल रहा है। मेरे सभी अंगों में अत्यंत पीड़ा हो रही है। मेरा मुख सूख रहा है॥18॥
 
Arjuna! Your arrows have pierced all my body parts; hence my body is burning. I am in extreme pain in all the vital parts. My mouth is getting dry.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)