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mahabharat 6.121.17: राजन! पाण्डुपुत्र अर्जुन को प्रणाम करके सामने खड़ा देखकर धर्मात्मा भीष्म अत्यन्त प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले- 17॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.121.17 
तं दृष्ट्वा पाण्डवं राजन्नभिवाद्याग्रत: स्थितम्।
अभ्यभाषत धर्मात्मा भीष्म: प्रीतो धनंजयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजन! पाण्डुपुत्र अर्जुन को प्रणाम करके सामने खड़ा देखकर धर्मात्मा भीष्म अत्यन्त प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले- 17॥
 
Rajan! Seeing Pandu's son Arjun standing in front after paying obeisance, the virtuous Bhishma became very happy and said thus - 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)