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mahabharat 6.121.15: भरत! ऐसा कहकर शान्तनु नन्दन भीष्म ने अपने वचनों से अन्य राजाओं की निन्दा की और कहा- ‘अब मैं अर्जुन को देखना चाहता हूँ।’   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.121.15 
एवमुक्त्वा शान्तनवो निन्दन् वाक्येन पार्थिवान्।
अर्जुनं द्रष्टुमिच्छामीत्यभ्यभाषत भारत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भरत! ऐसा कहकर शान्तनु नन्दन भीष्म ने अपने वचनों से अन्य राजाओं की निन्दा की और कहा- ‘अब मैं अर्जुन को देखना चाहता हूँ।’
 
Bhaarat! Having said this, Shantanu Nandan Bhishma denounced the other kings with his words and said- 'Now I want to see Arjun.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)