Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.121.1-2: संजय कहते हैं- महाराज! जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल हुआ, तब समस्त राजा, पाण्डव और आपके पुत्र पुनः वीरों की शय्या पर शयन करने वाले वीर पितामह भीष्म की सेवा के लिए आये। कौरवश्रेष्ठ! वे सभी क्षत्रिय क्षत्रियों में श्रेष्ठ भीष्म को प्रणाम करके उनके पास खड़े हो गए।॥1-2॥   |   mahabharat अध्याय 6.121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 121: अर्जुनका दिव्य जल प्रकट करके भीष्मजीकी प्यास बुझाना तथा भीष्मजीका अर्जुनकी प्रशंसा करते हुए दुर्योधनको संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  6.121.1-2 
संजय उवाच
व्युष्टायां तु महाराज शर्वर्यां सर्वपार्थिवा:।
पाण्डवा धार्तराष्ट्राश्च उपातिष्ठन् पितामहम्॥ १॥
तं वीरशयने वीरं शयानं कुरुसत्तम।
अभिवाद्योपतस्थुर्वै क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं- महाराज! जब रात्रि बीत गई और प्रातःकाल हुआ, तब समस्त राजा, पाण्डव और आपके पुत्र पुनः वीरों की शय्या पर शयन करने वाले वीर पितामह भीष्म की सेवा के लिए आये। कौरवश्रेष्ठ! वे सभी क्षत्रिय क्षत्रियों में श्रेष्ठ भीष्म को प्रणाम करके उनके पास खड़े हो गए।॥1-2॥
 
Sanjaya says- Maharaj! When the night passed and the morning came, all the kings, Pandavas and your sons again came to serve the brave grandfather Bhishma who was sleeping on the bed of heroes. Best of the Kurus! All those Kshatriyas bowed down to the Kshatriyas's greatest Bhishma and stood near him.॥ 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)