श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  6.120.71 
एवमुक्त: प्रत्युवाच स्मयमानो जनार्दन:।
तवैवैतद् युक्तरूपं वचनं पार्थिवोत्तम॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर के ऐसा कहने पर जनार्दन श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा - 'नृपश्रेष्ठ! आपका कथन सर्वथा युक्तिसंगत है ॥71॥
 
On Yudhishthir saying this, Janardan Shri Krishna said with a smile - 'Nripashrestha! Your statement is completely logical. 71॥
 
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भीष्मवधपर्वणि भीष्मोपधानदाने विंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें भीष्मको तकिया देनेसे सम्बन्ध रखनेवाला एक सौ बीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)