श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 67-68h
 
 
श्लोक  6.120.67-68h 
अवध्यो मानुषैरेव सत्यसंधो महारथ:।
अथवा दैवतै: सार्धं सर्वशास्त्रस्य पारग:॥ ६७॥
त्वां तु चक्षुर्हणं प्राप्य दग्धो घोरेण चक्षुषा।
 
 
अनुवाद
ये सत्यनिष्ठ योद्धा भीष्म समस्त शास्त्रों के ज्ञाता थे। मनुष्य और समस्त देवता मिलकर भी उन्हें नहीं मार सकते थे। आप अपनी दृष्टि मात्र से ही अन्यों को भस्म कर देने में समर्थ हैं। आपके पास पहुँचते ही भीष्म आपकी प्रचण्ड दृष्टि से भस्म हो गए।॥67 1/2॥
 
‘This truthful warrior Bhishma was a learned scholar of all the scriptures. Even humans and all the gods combined could not kill him. You are capable of reducing others to ashes with just a glance. On reaching you, Bhishma was destroyed by your fierce glance.’॥ 67 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)