श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  6.120.60-61h 
ततस्ते विस्मयं जग्मुर्नानाजनपदेश्वरा:॥ ६०॥
स्थितिं धर्मे परां दृष्ट्वा भीष्मस्यामिततेजस:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अमित तेजस्वी भीष्मकी उत्तम धर्मनिष्ठा देखकर विविध जनपदोंके राजा और नरेश आश्चर्यचकित हो गये ॥60 1/2॥
 
Thereafter, the lords and kings of various districts were astonished to see the excellent devotion towards religion of Amit Tejasvi Bhishma. 60 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)