श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  6.120.56-57 
तान् दृष्ट्वा जाह्नवीपुत्र: प्रोवाच तनयं तव॥ ५६॥
धनं दत्त्वा विसृज्यन्तां पूजयित्वा चिकित्सका:।
एवंगते मयेदानीं वैद्ये: कार्यमिहास्ति किम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर गंगानन्दन भीष्म ने आपके पुत्र दुर्योधन से कहा - 'बेटा! इन वैद्यों को धन देकर आदरपूर्वक विदा करो। इस अवस्था में इन वैद्यों से मुझे क्या प्रयोजन है?॥ 56-57॥
 
Seeing them, Ganganandan Bhishma said to your son Duryodhan - 'Son! Give money to these doctors and send them away with respect. What use do I have with these doctors here in this condition?॥ 56-57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)