श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.120.54 
परिखा खन्यतामत्र ममावसदने नृपा:।
उपासिष्ये विवस्वन्तमेवं शरशताचित:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं! मेरे इस स्थान के चारों ओर एक खाई खोदो। मैं यहाँ सैकड़ों बाणों से बिंधे हुए अपने शरीर से भगवान सूर्य की इसी प्रकार पूजा करूँगी।
 
‘O kings! Dig a trench around this place of mine. I will worship Lord Surya here in this manner with my body pierced by hundreds of arrows. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)