श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 52-53
 
 
श्लोक  6.120.52-53 
ये तदा मां गमिष्यन्ति ते च प्रेक्ष्यन्ति मां नृपा:।
दिशं वैश्रवणाक्रान्तां यदाऽऽगन्ता दिवाकर:॥ ५२॥
नूनं सप्ताश्वयुक्तेन रथेनोत्तमतेजसा।
विमोक्ष्येऽहं तदा प्राणान् सुहृद: सुप्रियानिव॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जब सूर्यदेव सात घोड़ों से जुते हुए तेजस्वी रथ पर सवार होकर कुबेर के निवासस्थान उत्तर दिशा में आएंगे, उस समय जो राजा मेरे पास आएंगे, वे मेरी ऊर्ध्वगति देख सकेंगे। निश्चय ही उस समय मैं अपने प्रियतम मित्रों के समान अपने प्राण त्याग दूंगा। ॥52-53॥
 
‘When the Sun comes to the northern path, the abode of Kubera, in a brilliant chariot drawn by seven horses, the kings who will come to me at that time will be able to see my upward movement. Certainly, at that time I will give up my dear life like my dearest friends. ॥ 52-53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)