श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.120.45-46h 
अभिप्राये तु विदिते धर्मात्मा सव्यसाचिना॥ ४५॥
अतुष्यद् भरतश्रेष्ठो भीष्मो धर्मार्थतत्त्ववित्।
 
 
अनुवाद
जब शुभचिंतक अर्जुन ने उसका अभिप्राय समझकर उचित तकिया रख दिया, तब धर्म और अर्थ के तत्त्व को जानने वाले धर्मात्मा भीष्म अत्यन्त संतुष्ट हो गए ॥45 1/2॥
 
When the well-intentioned Arjun understood his intention and placed the right pillow, then the virtuous Bhishma, who knew the essence of religion and wealth, became very satisfied. 45 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)