श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.120.4 
अश्मसारमयं नूनं हृदयं मम संजय।
श्रुत्वा विनिहतं भीष्मं शतधा यन्न दीर्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय! मेरा हृदय निश्चय ही लोहे का बना है, क्योंकि आज भीष्म की मृत्यु का समाचार सुनकर भी वह सैकड़ों टुकड़ों में नहीं टूट रहा है।
 
Sanjay! My heart is definitely made of iron because even after hearing the news of Bhishma's death today, it is not breaking into hundreds of pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)