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mahabharat 6.120.39: संजय कहते हैं: हे राजन! तब अर्जुन ने भीष्म को प्रणाम किया, अपना विशाल धनुष उठाया और अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनकी ओर देखकर इस प्रकार कहा:   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  6.120.39 
संजय उवाच
समारोप्य महच्चापमभिवाद्य पितामहम्।
नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यामिदं वचनमब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! तब अर्जुन ने भीष्म को प्रणाम किया, अपना विशाल धनुष उठाया और अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनकी ओर देखकर इस प्रकार कहा:
 
Sanjaya says: O King! Then Arjuna bowed to Bhishma, took up his huge bow, and looking at him with tearful eyes said thus:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)