श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.120.38 
धनंजय महाबाहो शिरो मे तात लम्बते।
दीयतामुपधानं वै यद् युक्तमिह मन्यसे॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु धनंजय! मेरा सिर नीचे लटक रहा है। बेटा! जो तकिया तुम्हें उपयुक्त लगे, उसे यहाँ ले आओ।॥38॥
 
Mahabahu Dhananjay! My head is hanging down. Son! Bring here any pillow you think is suitable for it.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)