Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 6.120.37: इसके बाद उन्होंने श्रेष्ठ भुजाओं वाले, सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध कुशल योद्धा पाण्डुपुत्र धनंजय की ओर देखकर इस प्रकार कहा-॥37॥   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.120.37 
ततो वीक्ष्य नरश्रेष्ठमभ्यभाषत पाण्डवम्।
धनंजयं दीर्घबाहुं सर्वलोकमहारथम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने श्रेष्ठ भुजाओं वाले, सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध कुशल योद्धा पाण्डुपुत्र धनंजय की ओर देखकर इस प्रकार कहा-॥37॥
 
After this, he looked at Dhananjay, son of Pandu, the best-armed man, the famous expert warrior of all the worlds and said thus - ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)