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श्री महाभारत
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पर्व 6: भीष्म पर्व
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अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद
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श्लोक 35
श्लोक
6.120.35
ततो नृपा: समाजह्रुस्तनूनि च मृदूनि च।
उपधानानि मुख्यानि नैच्छत् तानि पितामह:॥ ३५॥
अनुवाद
तब राजा तुरन्त ही उत्तम, कोमल और कोमल वस्त्र से बने हुए बहुत से तकिये ले आये; परन्तु भीष्म पितामह ने उन्हें स्वीकार करना स्वीकार नहीं किया।
Then the kings immediately brought many pillows made of fine, soft and delicate cloth; but Grandfather Bhishma did not wish to accept them. 35.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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