अभिमन्त्र्याथ तानेवं शिरसा लम्बताब्रवीत्।
शिरो मे लम्बतेऽत्यर्थमुपधानं प्रदीयताम्॥ ३४॥
अनुवाद
इस प्रकार उन सब लोगों का स्वागत करके उसने अपने झुके हुए सिर से कहा - 'हे राजाओं! मेरा सिर बहुत झुक गया है। इसके लिए आप सब लोग मुझे एक तकिया देने की कृपा करें।'
Having thus welcomed all those people, he said through his hanging head - 'O kings! My head is hanging very much. For this, you all please give me a pillow'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)