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mahabharat 6.120.34: इस प्रकार उन सब लोगों का स्वागत करके उसने अपने झुके हुए सिर से कहा - 'हे राजाओं! मेरा सिर बहुत झुक गया है। इसके लिए आप सब लोग मुझे एक तकिया देने की कृपा करें।'   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  6.120.34 
अभिमन्त्र्याथ तानेवं शिरसा लम्बताब्रवीत्।
शिरो मे लम्बतेऽत्यर्थमुपधानं प्रदीयताम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उन सब लोगों का स्वागत करके उसने अपने झुके हुए सिर से कहा - 'हे राजाओं! मेरा सिर बहुत झुक गया है। इसके लिए आप सब लोग मुझे एक तकिया देने की कृपा करें।'
 
Having thus welcomed all those people, he said through his hanging head - 'O kings! My head is hanging very much. For this, you all please give me a pillow'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)