श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.120.27 
स संज्ञामुपलभ्याशु भारद्वाज: प्रतापवान्।
निवारयामास तदा स्वान्यनीकानि मारिष॥ २७॥
 
 
अनुवाद
आर्य! सावधान होकर महाबली द्रोणाचार्य ने तुरन्त ही अपनी सेनाओं को युद्ध करने से रोक दिया।
 
Arya! On becoming alert, the mighty Dronacharya immediately stopped his armies from fighting. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)