श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  6.120.23-24 
दृष्ट्वा च पतितं भीष्मं पुत्रो दु:शासनस्तव।
उत्तमं जवमास्थाय द्रोणानीकमुपाद्रवत्॥ २३॥
भ्रात्रा प्रस्थापितो वीर: स्वेनानीकेन दंशित:।
प्रययौ पुरुषव्याघ्र: स्वसैन्यं स विषादयन्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म को युद्धभूमि में गिरे हुए देखकर आपका वीर पुत्र सिंह-पुरुष दु:शासन अपने भाई के कहने पर अपनी सेना से घिरा हुआ बड़े वेग से द्रोणाचार्य की सेना की ओर दौड़ा। उस समय वह कौरव सेना को कष्ट पहुँचा रहा था॥ 23-24॥
 
Seeing Bhishma fallen on the battlefield, your brave son, the lion-man Dushasan, on being sent by his brother, surrounded by his own army, ran towards Dronacharya's army with great speed. At that time he was causing distress to the Kaurava army.॥ 23-24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)