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mahabharat 6.120.22: जब कौरव पितामह भीष्म इस प्रकार रथ से गिर पड़े, तब सर्वत्र हाहाकार मच गया। कहीं भी शालीनता का नामोनिशान नहीं रहा ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.120.22 
तथा निपतिते भीष्मे कौरवाणां पितामहे।
हाहाभूतमभूत् सर्वं निर्मर्यादमवर्तत॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब कौरव पितामह भीष्म इस प्रकार रथ से गिर पड़े, तब सर्वत्र हाहाकार मच गया। कहीं भी शालीनता का नामोनिशान नहीं रहा ॥22॥
 
When the Kaurava Pitamah Bhishma fell from the chariot in this manner, there was uproar everywhere. There was no sense of decency anywhere. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)