श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.120.21 
सम्मोहश्चापि तुमुल: कुरूणामभवत् तत:।
कर्णदुर्योधनौ चापि नि:श्वसेतां मुहुर्मुहु:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय कौरवों को घोर मोह हो गया था। कर्ण और दुर्योधन भी बार-बार गहरी साँसें ले रहे थे।
 
At that time the Kauravas were overcome with a great delusion. Karna and Duryodhana were also taking deep breaths repeatedly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)