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mahabharat 6.120.18: विजय के पश्चात् पाण्डव युद्ध के मुहाने पर खड़े होकर स्वर्ण जालों से सुसज्जित विशाल शंख बजा रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.120.18 
पाण्डवाश्च जयं लब्ध्वा संग्रामशिरसि स्थिता:।
सर्वे दध्मुर्महाशङ्खान् हेमजालपरिष्कृतान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
विजय के पश्चात् पाण्डव युद्ध के मुहाने पर खड़े होकर स्वर्ण जालों से सुसज्जित विशाल शंख बजा रहे थे।
 
The Pandavas, after their victory, stood at the battle-mouth, all of them blowing large conches decorated with golden nets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)