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श्लोक  6.120.17 
विषण्णवदनाश्चासन् हतश्रीकाश्च भारत।
अतिष्ठन् व्रीडिताश्चैव ह्रिया युक्ता ह्यधोमुखा:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरत! उसका चेहरा उदासी से ढका हुआ था। वह अपना चेहरा नीचा और अपमानित किए खड़ा था। 17।
 
Bharat! His face was covered with gloom. He was standing with his face downcast and disgraced. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)