श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.120.15 
इति स्म शरतल्पस्थं भरतानां महत्तमम्।
ऋषयस्त्वभ्यभाषन्त सहिता: सिद्धचारणै:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सिद्धों और चारणों सहित ऋषिगण बाणों की शय्या पर लेटे हुए भरतवंशी महापुरुष भीष्म को देखकर उपर्युक्त बातें कहते थे।
 
In this manner the Rishis along with the Siddhas and the Charanas, seeing the great man of the Bharata clan, Bhishma lying on the bed of arrows, used to say the above mentioned things.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)