श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.120.14 
अयं पितरमाज्ञाय कामार्तं शान्तनुं पुरा।
ऊर्ध्वरेतसमात्मानं चकार पुरुषर्षभ:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इसी सिंहपुरुष ने पूर्वकाल में अपने पिता शान्तनु को कामी जानकर स्वयं को ऊर्ध्वरेता (भक्तिपूर्ण ब्रह्मचारी) बना लिया था।॥14॥
 
This same lion-man, having known his father Shantanu to be lustful in the past, made himself an urdhvareta (devotional celibate).'॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)