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mahabharat 6.120.13: वहाँ महापुरुष भीष्म को शयन करते देख कुछ देवगण कहने लगे, 'वे समस्त ब्रह्मज्ञों के रत्न हैं, वे ब्रह्मज्ञों में श्रेष्ठ हैं।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  6.120.13 
अयं ब्रह्मविदां श्रेष्ठो ह्ययं ब्रह्मविदां वर:।
इत्यभाषन्त भूतानि शयानं पुरुषर्षभम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महापुरुष भीष्म को शयन करते देख कुछ देवगण कहने लगे, 'वे समस्त ब्रह्मज्ञों के रत्न हैं, वे ब्रह्मज्ञों में श्रेष्ठ हैं।॥13॥
 
Seeing the great man Bhishma sleeping there, some celestial beings said, 'He is the jewel of all those who know Brahman, he is the best among those who know Brahman.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)