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mahabharat 6.120.11: प्रजानाथ! कवच और ध्वजा छिन्न-भिन्न हो जाने पर शान्तनुपुत्र भीष्म को उस अवस्था में देखकर कौरव और पाण्डव दोनों सेनाएँ उन्हें घेरकर वहीं खड़ी हो गईं॥11॥   |   mahabharat अध्याय 6.120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.120.11 
भीष्मं शान्तनवं दृष्ट्वा विशीर्णकवचध्वजम्।
कुरव: पर्यवर्तन्त पाण्डवाश्च विशाम्पते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! कवच और ध्वजा छिन्न-भिन्न हो जाने पर शान्तनुपुत्र भीष्म को उस अवस्था में देखकर कौरव और पाण्डव दोनों सेनाएँ उन्हें घेरकर वहीं खड़ी हो गईं॥11॥
 
Prajanath! Seeing Shantanu's son Bhishma in that condition whose armour and flag were torn to pieces, both the Kauravas and the Pandavas surrounded him and stood there. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)