श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 120: भीष्मजीकी महत्ता तथा अर्जुनके द्वारा भीष्मको तकिया देना एवं उभय पक्षकी सेनाओंका अपने शिबिरमें जाना और श्रीकृष्ण-युधिष्ठिर-संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.120.1 
धृतराष्ट्र उवाच
कथमासंस्तदा योधा हीना भीष्मेण संजय।
बलिना देवकल्पेन गुर्वर्थे ब्रह्मचारिणा॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! भीष्म जी बलवान और देवता के समान थे। उन्होंने अपने पिता के लिए आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था। उस दिन उनके रथ से गिर जाने के कारण मेरे पक्ष के जो योद्धा उनके सहयोग से वंचित रह गए थे, उनका क्या हुआ?॥1॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! Bhishma ji was strong and like a god. He had observed celibacy throughout his life for the sake of his father. What happened to the warriors of my side who were deprived of his support due to his falling from the chariot that day?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)