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mahabharat 6.12.5: भगवान केशव स्वयं वहाँ दिव्य रत्नों को रखते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। वे वहाँ के लोगों पर प्रसन्न थे, इसलिए उन्होंने स्वयं ही उन्हें सुख पहुँचाने की व्यवस्था की है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 6.12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.12.5 
तत्र रत्नानि दिव्यानि स्वयं रक्षति केशव:।
प्रसन्नश्चाभवत् तत्र प्रजानां व्यदधत् सुखम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भगवान केशव स्वयं वहाँ दिव्य रत्नों को रखते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। वे वहाँ के लोगों पर प्रसन्न थे, इसलिए उन्होंने स्वयं ही उन्हें सुख पहुँचाने की व्यवस्था की है।॥5॥
 
Lord Keshav himself keeps the divine gems there and protects them. He was pleased with the people there, so he himself has made arrangements to bring happiness to them. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)