श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 49-50
 
 
श्लोक  6.12.49-50 
श्रुत्वेदं भरतश्रेष्ठ भूमिपर्व मनोनुगम्॥ ४९॥
श्रीमान् भवति राजन्य: सिद्धार्थ: साधुसम्मत:।
आयुर्बलं च कीर्तिश्च तस्य तेजश्च वर्धते॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! जो राजा भक्तिपूर्वक इस भूमिपर्व का श्रवण करता है, वह समृद्ध, यशस्वी और कुलीन प्रजा द्वारा सम्मानित होता है तथा उसके बल, आयु, यश और कीर्ति की वृद्धि होती है ॥49-50॥
 
Bharatshrestha! The king who listens to this Bhumi Parva with devotion, is honored by the prosperous, successful and noble people and his strength, age, fame and glory increase. 49-50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)