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mahabharat 6.12.46-48h: भरत! यहाँ सूर्य का वर्णन किया गया है। इन दोनों से बड़ा होने के कारण राहु कालान्तर में सूर्य और चन्द्रमा को ढक लेता है। महाराज! आपके प्रश्न के अनुसार, ग्रहों का शास्त्रों की दृष्टि से संक्षिप्त वर्णन किया गया है। मैंने ये सभी बातें आपके समक्ष यथार्थ रूप में प्रस्तुत की हैं। अतः आप शांति बनाए रखें। 46-47 1/2।   |   mahabharat अध्याय 6.12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 46-48h
 
 
श्लोक  6.12.46-48h 
एतत् प्रमाणमर्कस्य निर्दिष्टमिह भारत।
स राहुश्छादयत्येतौ यथाकालं महत्तया॥ ४६॥
चन्द्रादित्यौ महाराज संक्षेपोऽयमुदाहृत:।
इत्येतत् ते महाराज पृच्छत: शास्त्रचक्षुषा॥ ४७॥
सर्वमुक्तं यथातत्त्वं तस्माच्छममवाप्नुहि।
 
 
अनुवाद
भरत! यहाँ सूर्य का वर्णन किया गया है। इन दोनों से बड़ा होने के कारण राहु कालान्तर में सूर्य और चन्द्रमा को ढक लेता है। महाराज! आपके प्रश्न के अनुसार, ग्रहों का शास्त्रों की दृष्टि से संक्षिप्त वर्णन किया गया है। मैंने ये सभी बातें आपके समक्ष यथार्थ रूप में प्रस्तुत की हैं। अतः आप शांति बनाए रखें। 46-47 1/2।
 
Bharata! Here the Sun has been described. Because of its greater size than both of them, Rahu covers the Sun and the Moon in due course. Maharaj! According to your question, the planets have been briefly described from the viewpoint of scriptures. I have presented all these things to you in their true form. Therefore, you should maintain peace. 46-47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)