श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.12.41 
योजनानां सहस्राणि विष्कम्भो द्वादशास्य वै।
परिणाहेन षट्‍‍त्रिंशद् विपुलत्वेन चानघ॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
हे निष्पाप राजा! राहु ग्रह का व्यास बारह हजार योजन और परिधि छत्तीस हजार योजन है। 41.
 
O sinless king! The diameter of the planet Rahu is twelve thousand yojanas and its circumference is thirty-six thousand yojanas. 41.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)