श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.12.4 
गौरस्तु मध्यमे द्वीपे गिरिर्मान:शिलो महान्।
पर्वत: पश्चिमे कृष्णो नारायणसखो नृप॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! मध्य द्वीप में एक बहुत बड़ा मानसिल पर्वत है, जो 'गौर' नाम से प्रसिद्ध है। उसके पश्चिम में 'कृष्ण' पर्वत है, जो नारायण को अत्यंत प्रिय है।॥4॥
 
O Lord of men! In the middle island, there is a very big mountain of Mansil; which is famous by the name of 'Gaur'. To its west is the 'Krishna' mountain, which is very dear to Narayan. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)