श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  6.12.39-40 
संजय उवाच
उक्ता द्वीपा महाराज ग्रहं वै शृणु तत्त्वत:॥ ३९॥
स्वर्भानो: कौरवश्रेष्ठ यावदेव प्रमाणत:।
परिमण्डलो महाराज स्वर्भानु: श्रूयते ग्रह:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा— महाराज! मैंने द्वीपों का वर्णन कर दिया है। अब ग्रहों का यथार्थ वर्णन सुनिए। हे कौरवश्रेष्ठ! जैसा कि हमने सुना है, मैं आपको राहु की लंबाई-चौड़ाई के बारे में बताता हूँ। महाराज! मैंने सुना है कि राहु ग्रह गोलाकार है। 39-40।
 
Sanjaya said— Maharaj! I have described the islands. Now listen to the true description of the planets. O best of the Kauravas! I will tell you about the length and breadth of Rahu as we have heard. Maharaj! I have heard that the planet Rahu is circular. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)