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mahabharat 6.12.31: हे महाबाहु कुरुपुत्र! यहाँ के लोगों को सदैव पका हुआ भोजन उपलब्ध रहता है और वे उसी को खाकर जीवित रहते हैं ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 6.12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.12.31 
भोजनं चात्र कौरव्य प्रजा: स्वयमुपस्थितम्।
सिद्धमेव महाबाहो तद्धि भुञ्जन्ति नित्यदा॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे महाबाहु कुरुपुत्र! यहाँ के लोगों को सदैव पका हुआ भोजन उपलब्ध रहता है और वे उसी को खाकर जीवित रहते हैं ॥31॥
 
O mighty-armed son of Kuru! The people here always have cooked food available to them and they survive by eating that. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)