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mahabharat 6.12.3: महाराज! इन समुद्रों के चारों ओर के सभी द्वीप और पर्वत क्रमशः दुगुने होते जा रहे हैं।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 6.12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.12.3 
परस्परेण द्विगुणा: सर्वे द्वीपा नराधिप।
पर्वताश्च महाराज समुद्रै: परिवारिता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इन समुद्रों के चारों ओर के सभी द्वीप और पर्वत क्रमशः दुगुने होते जा रहे हैं।॥3॥
 
Maharaj! All the islands and mountains surrounding these oceans gradually double in size. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)