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mahabharat 6.12.23-24h: मुनिदेश के बाद का देश दुन्दुभिस्वन कहलाता है। वह सिद्धों और चारणों से परिपूर्ण है। हे जनेश्वर! वहाँ के लोग प्रायः गोरे हैं। महाराज! इन सभी देशों में देवता और गंधर्व निवास करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 6.12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 12: कुश, क्रौंच और पुष्कर आदि द्वीपोंका तथा राहु, सूर्य एवं चन्द्रमाके प्रमाणका वर्णन  »  श्लोक 23-24h
 
 
श्लोक  6.12.23-24h 
मुनिदेशात् परश्चैव प्रोच्यते दुन्दुभिस्वन:।
सिद्धचारणसंकीर्णो गौरप्रायो जनाधिप॥ २३॥
एते देशा महाराज देवगन्धर्वसेविता:।
 
 
अनुवाद
मुनिदेश के बाद का देश दुन्दुभिस्वन कहलाता है। वह सिद्धों और चारणों से परिपूर्ण है। हे जनेश्वर! वहाँ के लोग प्रायः गोरे हैं। महाराज! इन सभी देशों में देवता और गंधर्व निवास करते हैं।
 
The country after Munidesh is called Dundubhiswan. It is full of Siddhas and Charanas. O Janeshwar! The people there are generally fair. Maharaj! Gods and Gandharvas reside in all these countries. 23 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)