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mahabharat 6.119.d2h-34h: मेरा विश्वास है कि प्रभु समस्त लोकों के लिए अजेय हैं। इस समय मैं दो कारणों का आश्रय लेकर पांडवों से युद्ध नहीं करूँगा। पहला, पांडु की संतान होने के कारण वे मेरे लिए अजेय हैं और दूसरा, शिखंडी, जो पहले स्त्री था, मेरे सामने आ गया है।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक d2h-34h
 
 
श्लोक  6.119.d2h-34h 
(अजय्यश्चैव लोकानां सर्वेषामिति मे मति:।)
कारणद्वयमास्थाय नाहं योत्स्यामि पाण्डवान्॥ ३३॥
अवध्यत्वाच्च पाण्डूनां स्त्रीभावाच्च शिखण्डिन:।
 
 
अनुवाद
मेरा विश्वास है कि प्रभु समस्त लोकों के लिए अजेय हैं। इस समय मैं दो कारणों का आश्रय लेकर पांडवों से युद्ध नहीं करूँगा। पहला, पांडु की संतान होने के कारण वे मेरे लिए अजेय हैं और दूसरा, शिखंडी, जो पहले स्त्री था, मेरे सामने आ गया है।
 
I believe that the Lord is invincible for all the worlds. At this time I will not fight with the Pandavas, taking shelter of two reasons. Firstly, being the children of Pandu, they are invincible for me and secondly, Shikhandi, who was earlier a woman, has come in front of me. 33 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)