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mahabharat 6.119.98-99: मानसरोवर में निवास करने वाले हंसरूपी वे महामुनि बड़ी उत्सुकता से एक साथ उड़ते हुए उस स्थान पर आये, जहाँ कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म बाणों की शय्या पर शयन कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 6.119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 119: कौरवपक्षके प्रमुख महारथियोंद्वारा सुरक्षित होनेपर भी अर्जुनका भीष्मको रथसे गिराना, शरशय्यापर स्थित भीष्मके समीप हंसरूपधारी ऋषियोंका आगमन एवं उनके कथनसे भीष्मका उत्तरायणकी प्रतीक्षा करते हुए प्राण धारण करना  »  श्लोक 98-99
 
 
श्लोक  6.119.98-99 
तत: सम्पातिनो हंसास्त्वरिता मानसौकस:॥ ९८॥
आजग्मु: सहिता द्रष्टुं भीष्मं कुरुपितामहम्।
यत्र शेते नरश्रेष्ठ: शरतल्पे पितामह:॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
मानसरोवर में निवास करने वाले हंसरूपी वे महामुनि बड़ी उत्सुकता से एक साथ उड़ते हुए उस स्थान पर आये, जहाँ कुरुवंश के वृद्ध पितामह भीष्म बाणों की शय्या पर शयन कर रहे थे।
 
Those great sages in the form of swans, residing in Manasarovar, flying together in great eagerness came to the place to see Bhishma, the old patriarch of the Kuru clan, where that best of men was sleeping on a bed of arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)